- भिभास बेनाामी, बकैनिया, उदयपुर


उतराहा हवा जुर जुर बैहेछै, चहरलै आशिन मास
कैँरचीके टाटमे घेरा फुलाइलै, जितियाके लागलै चास

धीबेटी सब मोटा बोकने, चलैछै लैहियरके बाट
हरियर चौरी फरीछ लदी, उचारैछै जितियाके बात

ककरो दोहर्याल तेहर्याल जितिया, ककरो चियै पैहैनका
लैहियर लागैछै तिरथ घाम, भेट हैछै सखी बैहेनपा

सौसराके भात पीयाके साथ, सबकोई करे बखान
लैहियरसे आनघर करमके खेल, मिले मान अपमान

बेटी येलै घर, नाउ जोरैछै, बाधमे घसा चाँछ
भिनसरवाके ओटघन नुरैछै, चोटगर ओल या माछ

भैर दिन भैर राइत पवैनकरी सब, करैछै धियानसे उपास
खर दिनके जितिया, जितमहानके कथा, सतमे करैछै विश्वास

लाल सारी सीथमे सिनुर, पवैनकरी देवी परमान
पोखैर बन्याके पुजैले बैठल, ल्याके पुजाके समान

सिकीके घोरामे बैहेनके बैठ्याके, भाई पोखैर नङ्हाई
तीनटा बेटाभेल जलानीके हाथसे, पवैनकरी जीह खोधहाई

अँखरे चौर या बौटरा घोइटके, पवैनकरी करैछै पारन
दही चुरा सोटैछै मन भोइरके, करैछै जितिया उसारन

जे जाने जितियाके भेद वोकर, बालबच्चा बने बलगर तेज
फेन आव्हिये सुइध लागल जितिया घुइरके, ल्याके शुभ सनेस

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